🙏🙏🙏🙏आज भी ब्राह्मण छाती ठोक कर सम्मान पा सकता है। क्या आप तैयार है?

 


आइए आज जानते हैं कि ब्राह्मण भारत के समाज में सबसे अधिक सम्मानित वर्ण क्यों था। दरअसल आज की शिक्षा पद्दति समाज को सिखाती है कि आप पैसे के लिए काम कैसे करें? जिससे कि आपका जीवन सुखी हो जाए। पर वाक्य को ठीक से पढिए इस वाक्य में ही गुलामी छुपी हुई है। जब आप किसी (पैसे) के लिए काम करने के लिए निमंत्रण पा रहे हैं तो आपकी स्वतंत्रता का हनन तो इस प्रस्ताव से ही कर लिया गया है। आप को सीधे सीधे गुलामी का निमंत्रण मिल रहा है। जिस दिन भारत में यह सोच समाज पर शासन करने लगी उसी दिन से इस समाज का पतन हो गया। आपकी सोच उलटी हो गई है। आप सोच कर देखिए इसी घड़ी अगर आपको कोई यह सिखाने लगे कि पैसा आपके लिए कैसे काम करे तो क्या आप उस से किसी प्रकार का शत्रुता का बर्ताव कर सकोगे? आज भी समाज में उन लोगों का सम्मान है जो यह सिखाते हैं कि पैसा आपके लिए कैसे काम करेगा। परंतु ऐसे शिक्षक आपकी मैंन स्ट्रीम एजुकेशन में आपको नहीं मिलेंगे। आपकी प्रचलित शिक्षा का उद्देश्य ही यह है कि आपको पहले दिन ही गुलाम बना लिया जाए। धरती की राक्षसी वृतियों ने यूरोप से निकल कर पूरे उस समाज को नष्ट कर डाला जो प्राकृतिक रूप से जीवन यापन कर रहा था और वह जानता था कि अर्थ व्यवस्था समाज के लिए कैसे काम करती है। परंतु सत्ता के प्यासे लोगों ने गुलाम प्रथा का सुख भोगने के लिए उस अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लिया और यह सिखाया जाने लगा कि जीना है तो आपको पैसे के लिए काम करना होगा। आपको जिंदा रहने का ही लक्ष्य दे दिया गया है और आप इसे बड़ी उपलब्धि मानने लगे हैं। जब कि आनंद से जीने के लिए आपको यह सीखना होगा कि पैसा आपके लिए कैसे काम करेगा? पितृकुल पर लंबे समय से काम करते हुए मै इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि हमे तेजी से एक ब्राह्मण समाज खड़ा करना होगा जो जन्म से नहीं कर्म से ब्राह्मण हो। अर्थात एक ऐसा मनुष्य चाहिए जो समाज को तेजी से सिखाए कि पैसा उनके लिए कैसे काम कर सकता है। इस निमंत्रण में कोई जाति बंधन नहीं है। किसी भी कुल परंपरा में जन्मा धरती का कोई भी मनुष्य ब्राह्मण हो सकता है जो समाज को यह सिखाए कि पैसा उनके लिए कैसे काम करेगा।