बच्चे के सुखद भविष्य के लिए महीने में एक बार उसके स्कूल आप भी जाएं... ( अपने बच्चे के जन्म दिन पर इसे उसके नाम और फोटो सहित छपाएं )


प्रिय अभिभावक, 
आपके बच्चे स्कूल जाते हैं? बच्चों के जीवन के कीमती वर्ष, अपना बहुत सारा पैसा बिता कर आप तथा आपका बच्चा पाता क्या है? परीक्षाएँ पास कर लेने के बदले एक मार्कशीट? जिसमें लिखा होता है कि आपके बच्चे ने किस विषय में कितने अंक पाए? 

क्या आप जानते हैं कि इन अंकों का ये मतलब होता है कि जितने अंक आए हैं, इस वर्ष बच्चे ने जो निर्धारित पुस्तक पढ़ी है उस पुस्तक की उतना प्रतिशत विषय वस्तु की समझ आपके बच्चे को है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी में अगर 100 में से 70 अंक आए हैं तो इसका अर्थ ये हुआ कि उसे अपनी पुस्तक का लगभग 70% भाग अच्छी तरह से समझ आता है। गणित में अगर 100 में से 82 अंक आते हैं तो इसका अर्थ होता है कि बच्चे को करने के लिए दिया जाए तो लगभग 82 प्रतिशत गणित वह कर के दिखा सकता है।

ज्यादा अंक आना इस बात का प्रमाण है कि आपके बच्चे को उन विषय की ज्यादा समझ है। यह मार्कशीट वैसे ही होती है जैसे एक किराणा व्यापारी बैग में 10 थैलियों में चीजें डाल कर हर वस्तु का नाम और वजन लिख कर आपको अलग से एक पर्ची पकड़ाता है। हर थैली में रखी वस्तु का नाम और उस थैली में रखी वस्तु का वजन लिखा हो तो आपको पूरा थैला देखना नही पड़ेगा। परंतु क्या कभी आप पर्ची पर भरोसा कर लोगे? या खोल खोल कर हर चीज की और उसके वजन की जाँच करोगे?

सोचिये, किसी दिन आपके घर के आगे एक गाड़ी आए। एक बड़ी सी बोरी जिसमें 5 किलो चीनी हो और बड़े बड़े अक्षरों में उस पर लिखा हो “वजन 100 किलो”। आकार इतना बड़ा कि आपके पड़ोसी भी पढ़ लें। वे भी आपके घर आई इतनी चीनी पर मुस्कुरा दें। क्या वजन पढ़ कर आप विक्रेता की तोली हुई 100 किलो चीनी मंजूर कर लेंगे? कम तोलकर ज्यादा दिखाने वाला दुकानदार अपना काम निरंतर करता जाए और ग्राहक 5 किलो तुली चीनी पर लिखे 100 किलो वजन को मंजूर करता जाए तो दुकानदार तो अमीर हो जाएगा परंतु जानबूझकर या अंजाने में ग्राहक को यह गलत आदत लग जाए तो वह बरबाद हो जाता है। 

कल्पना करें आपने बच्चे को 10 किलो चीनी लाने के लिए भेजा, वजन उठाने के आलस या डर से वह 4 किलो ही चीनी लेकर आए तो क्या आपको मंजूर होगा? दुकानदार से उसका समझौता हो जाए कि वह हर बार कम तुलवा कर ज्यादा लिखा लाए तो स्थिति आपके लिए और खतरनाक हो जाती है। स्कूल में बच्चा जब पढ़कर वर्ष के अंत में मार्कशीट लेकर आता है तो अच्छे नम्बर देख कर हम खुश हो जाते हैं। अक्सर मिठाई भी बाँटते हैं। अच्छे नम्बर लाने के नाम पर बच्चे अक्सर घर में ईनाम भी पाते हैं। बिना तोले जब आप किराणे के व्यापारी के दिए गये थैले पर विश्वास नही करते तो स्कूल की दी गई मार्कशीट पर विश्वास कैसे कर लेते हैं? 

भारत भर में आजकल स्कूलों में इस तरह की भारी ठगी चल रही है। अपने बच्चे के भविष्य के लिए आपको उन पर धन खर्च करने के अलावा और भी कदम उठाने होंगे। अन्यथा, अधिकाँश अभिभावक आज विद्यालयों में ठगे जा रहे हैं। चौकस अभिभावक भी आजकल इतना भर कर रहे हैं कि घर पर उसकी देखभाल करने के लिए अतिरिक्त धन और समय खर्च कर रहे हैं। ये वैसे ही है जैसे सिनेमा हॉल में टिकट कटा कर तीन घण्टे बरबाद भी करें और पिक्चर भी नही देखें। रास्ते में आते हुए उस पिक्चर की एक डीवीडी पर पैसा खर्च करें और घर पर तीन घण्टे और बरबाद करें। 

बाजार की चीजें खरीदते हैं तो कम तोलकर ज्यादा लिखने पर आप दुकानदार के पास शिकायत के लिए जाते हैं। हैरानी की बात है कि स्कूल में आपके बच्चे को कम पढ़ाकर ज्यादा अंक दे दिये जाने पर खुश होते हो कभी शिकायत भी नही करते। कम तुले पर अधिक की पर्ची चिपकी देख कर आप खुश हो तो कौन अध्यापक आपके बच्चे को झूठे नम्बर देकर वजन नही बढ़ा देगा?

बोर्ड की परीक्षाओं और विश्वविद्यालयों में भी जान छुड़ाने के लिए परीक्षा कॉपियों में अधिक नम्बर दे दिये जाते हैं। क्या आप साहस करोगे कि उपभोक्ता अदालतों में ऐसे मामले लाकर शिक्षातंत्र पर सवाल उठा सको? इन तथ्यों पर आप खुद विचार करें और अन्य अभिभावकों को भी सोचने के लिए प्रेरित करें। धन्यवाद। 

सुरेश कुमार शर्मा, मनोविश्लेषक 

ई – 144, अग्रसेन नगर,

चूरू 331001 9929515246

स्कॉलरशिप और मानद उपाधियों का खेल ...

बाजार में उत्पाद या अन्य सेवाओं पर मिलने वाली छूट को डिस्काउण्ट कहते हैं । इसी प्रकार किसी शिक्षण संस्थान या शिक्षक द्वारा अपने कार्य पर दी जाने वाली छूट को स्कॉलरशिप कहते हैं। मान लीजिये किसी शिक्षक ने अपने अध्यापन कार्य की फीस सालाना 10, 000 रूपये तय की हुई है। जब किसी छात्र का उसकी कॉचिंग में पंजीयन होता है तो उसकी मेरिट, जाति, आय आदि के आधार पर कॉचिंग का मालिक शिक्षक उसे जितनी छूट देना चाहता है उस राशि का एक अलग से आवेदन पत्र भरा लेता है। जितनी राशि का ये आवेदन भरा जाता है, कुल आवेदनों में  दी गई इस प्रकार की छूट का योग स्कॉलरशिप कहलाता है। बड़े बड़े शिक्षण� संस्थानों द्वारा जब अपने विज्ञापनों में इस राशि का स्कॉलरशिप वितरण के रूप में उल्लेख किया जाता है तो अभिभावक और विद्यार्थियों के लिए यह आकर्षण का केन्द्र बन जाता है। 
इसी प्रकार से मानद उपाधियों का खेल समझना चाहिए। बाजार में जिस प्रकार निर्माता अपनी दवाइयाँ सैम्पल के रूप में चिकित्सकों को बाँटता है या कोई अन्य उत्पादक किसी दूसरे उत्पाद के साथ अपना उत्पाद फ्री देता है तो वह अपने उत्पाद का प्रचार कर रहा होता है। इसी प्रकार समाज के प्रतीष्ठित व्यक्तियों को उनके जीवन भर के अनुभव या उपलब्धियों के आधार पर कोई विश्वविद्यालय डॉक्टरेट या एसोसिएट की मेडल देता है तो समाज में उस विश्वविद्यालय की पहचान बन जाती है। वे अपने विश्वविद्यालय की पहचान उस नामचीन आदमी से जोड़ कर स्कूल कॉलेजों में बच्चों के सामने प्रजेंटेशन दे कर अपने वहाँ आगे का अध्ययन के लिए प्रेरित करते हैं। 
भारत में स्कॉलरशिप (डिस्काउण्ट) और उपाधियों (सैम्पल) का दौर अभी शुरू ही हुआ है। सरकार चाहे तो बाजार के इन तौर तरीकों को बढावा दे कर निजी क्षेत्र में लगे शिक्षकों को भीषण शोषण से बचा सकती है। योग्य व्यक्तियों को शिक्षा क्षेत्र में रोक सकती है। अन्यथा यहाँ तो हाल ये है कि किसी युवक के पास ऑप्शन हो की ट्रैफिक पुलिस की नौकरी और विध्यालय में टीचर होना दो में से किसी एक का चुनाव करना हो तो वह दिल्ली के किसी व्यस्त चौराहे पर अपनी ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटि लगवाना पसन्द करेगा। 

पहचान का संकट खाए जा रहा है...

एक्रेडिशन, ऑथोराइजेशन, रजिस्ट्रेशन, एफिलिएशन, सर्टिफिकेशन ... UGC, State Board, Center Board, AICTE, DDE और इनके आपस के झगड़े... हे भगवान। फिर शिक्षा मंत्रालय का इन झगड़ों के निपटाने के लिए एक नया आयोग, कमेटी, जॉइंट कमेटी बनाना। उस कमेटी, आयोग को स्थाई दर्जा दे देना। आपको लगता नही कि ये एक घोर षड्यंत्र है?

पहचान का संकट शिक्षा में सब जगह व्याप्त है। शिक्षा के उपभोक्ता को सरकार ने इतना आतंकित कर रखा है कि बेचारा दो अक्षर सीखने के लिए पाँच पैसा खर्च करते समय भी काँप जाता है। लगता है कि जैसे सीखने वाला किसी से अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कहीँ पैसे दे देता है तो सिखाने वाला और सीखने वाले दोनों कोई राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं।

मिंया बीबी राजी तो क्या करेगा काजी। जैसी कहावत भी अब बेकार हो रही है... एक दुकान किसी को कोई हूनर बेच रही है, उसे जो कुछ आता था लिख कर दे दिया कि मैं सर्टिफाइ कर रहा हूँ कि ...... ने ..... दिन में ..... अमुक कॉर्स पूरा कर लिया है। तो उन लोगों को बेचैनी हो जाती है जो किसी को सर्टिफाइ करने के लिए ठेका लिए हुए हैं। फिर एक आदमी को उसकी दुकान में असंतुष्ट रहने के लिए ही भेजा जाता है। कोर्ट केस होता है। दुकान बन्द करा दी जाती है।

आखिर ये पहचान और उस पहचान पत्र को जारी करने वाली ठेकेदारी किसी नागरिक को दे क्या रही है? बन्द कमरों में से चर्चाएं बाहर निकल कर आती है कि जवान होती भीड़ को कॉर्स करने के नाम पर अटकाए रखो, अगर ये भीड़ उग्र हो गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। जिस किसी तरह से ये धीरज से अपनी आयु की 25वीं देहली पार करले तो इसका गुस्सा शांत हो जाएगा। फिर दो वक्त की रोटी के लिए कहीं मरता खपता रहेगा।

औपचारिक शिक्षा संस्थानों की तुलना आप एक ऐसे स्टोर से करें जिसमें मालिक, नौकर मिल कर उपभोक्ता को एक अच्छा पैकिंग का डिब्बा देने, डिलिवरी सुपूर्दगी के सैकड़ों आपसी प्रमाणक (जिससे सब एक दूसरे पर माल की पूर्ति की गारण्टी की जिम्मेदारी डाल सकें) तैयार करने में समय, संसाधन खर्च कर देते हैं।

विद्यार्थी (ग्राहक) को सैम्पल मात्र दिखा कर अच्छा पैसा झटक लिया जा रहा है। सत्र पूरा हो जाता है और ग्राहक को मिलता है बाबाजी का ठुल्लू ( जैसे कॉमेडी सीरियल में कपिल देता है)।

अनौपचारिक शिक्षा संस्थान समाज को अपनी जिम्मेदारी पर खड़े करने चाहिए। भले ही आपको मान्यता प्राप्त पैकिंग प्रमाण पत्र ना मिले पर माल तो मिलेगा ना अपनी पसन्द का ?  

अपने भूतकाल को याद करो

अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताओ।
किसी बर्थ डे/अन्य समारोह की शानदार घटना बताओ।
सेकेण्ड्री स्कूल का सबसे अच्छा दोस्त कौन था? वह अब क्या करता है?
अपने पहले काम के बारे में बताओ। कितना वेतन मिला था?
बचपन में बड़े होने के बारे में आपके क्या सपने थे?
अपने बचपन के किन चित्रों को देखकर आपको अच्छा लगता है? आप ये फोटो कहाँ रखते हो?
जीवन का कोई ऐसा अवसर बताओ जब लोग सोचते थे कि आप गलत हो पर आप सही साबित हुए थे?
सेकेण्ड्री स्कूल के अपने दिनों को एक शब्द में समझाओ।
आप ग्रुप के रूप में आखरी बार कब खेले थे?
बचपन में सबसे मजेदार हरकतें क्या होती थी?

पैसा चुकाकर भी आपको मजा नही आया हो ऐसा कोई अवसर बताओ।
स्कूल के अपने पहले दिनों या पहले अध्यापक के बारे में आपको क्या क्या याद है?
सबसे अच्छा/बुरा सफर कौनसा था? स्पष्ट करो कैसे?
कभी हड्डी टूटी है?
ऐसा क्या है जिसे करके आप स्वयं हैरान रह गये थे?
खून निकलने का कोई सबसे बड़ा अवसर बताओ?
अपने किसी पालतू जानवर का नाम याद करके बताओ।
आप किसी ज्योतिषी से मिले हो? अपना अनुभव बताओ।
आप के स्कूल के दिन कठिन थे? स्पष्ट करो।
सेकेंड्री स्कूल में आप किस तरह के दोस्तों के साथ समय बिताते थे?
अपने पसन्दीदा अध्यापक के बारे में बताओ। अब उसके बारे में क्या धारणा बदल गई?
अपनी सबसे अच्छी खरीददारी के बारे में बताओ।
बचपन का कोई मकान याद है जो आपसे बहुत दूर था और आप खेलने गये थे।
समय के साथ अब आपकी क्या प्राथमिकताएं बदल गई है?
माता पिता से मिले पहले दण्ड के बारे में बताओ।
किन सबसे भयानक हालात से आपको सामना करना पड़ा था?
किसी ने आपको चौंकाने के लिए क्या योजना बनाई थी? आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
स्कूल के दिनों में आपका प्रिय विषय क्या था?
आपके जीवन पर सबसे गहरा असर किसका है? स्पष्ट करो।
सबसे लम्बी मित्रता किसके साथ थी जो अब नही रही?
आपकी उससे मुलाकात कब व कैसे हुई थी?
आपने या आपके किसी मित्र ने कभी पुलिस बुलाई है?
किस त्योंहार पर आपका घर सबसे अधिक सजाया जाता है?
किसी अजनबी की कभी कोई मदद की है? अनुभव बताओ।
बचपन में कौनसे कार्टून या कोमिक्स पढ़ते/देखते थे?
कोई मेहरबानी बताओ जो आपने किसी पर की/किसी से पाई हो?
आपने कभी गिरने/उड़ने/दौड़ने का सपना देखा है? वर्णन करो।
आपको कभी कोई आभास हुआ है जो बाद में सच हो गया हो?
आप कभी जज/रेफरी/एम्पायर बनाए गए थे? कैसा अनुभव रहा? किस तरह के निर्णायक दुबारा बनना पसन्द करोगे?
क्या बचपन में आपको चिढ़ाया जाता था? स्पष्ट करो।
बचपन की कोई दुर्घटना बताओ जो अभी तक भूले नही हो।
कोई पिकनिक का अवसर बताओ?
कोई अध्यापक बताओ जिसे आप सबसे अधिक ना पसन्द करते थे?
क्या कभी आप को उस सजा से मुक्ति मिली है जो वास्तव में आपको मिलनी चाहिए?
परीक्षा में अपनी नकल करने की आदत का वर्णन करो।


बचपन का कोई भ्रम बताओ जिसे आप सच मान बैठे थे?
बचपन में आप कभी अभिनय/गायन/भाषण करते थे?
क्या है जो आप बचपन से आज तक अनुभव करते आ रहे है?
कोई सबसे अच्छी सलाह बताओ जो आज तक आपके काम आ रही हो।
स्कूल में प्रा:य किस तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ता था?
बचपन में कोई ऐसा अवसर बताओ जब उपहार हाथ में आने से पहले ही उसमें झांकने लग गए थे/चीज खाने के लिए बेचैन हो गए थे। मेहमानों से आपकी क्या अपेक्षा रहती थी?
आज आपने बचपन के देखे कौनसे सपने सच कर लिये हैं?
आज तक आपने सबसे बड़ी खरीद क्या की है?
रात का कौनसा सपना था/है जो सबसे भयानक हो।
बहन भाई में आपके जन्म के क्रम ने आप पर क्या असर डाला?
आपने कभी किसी को सलाह दी थी? उसका जीवन उससे कैसे प्रभावित हुआ?
आपकी सबसे बड़ी शरारत क्या रही है?
बचपन से आज तक आपके माता-पिता आपके किस व्यवहार का आज तक सम्मान/अपमान करते आ रहे है?
अपने माता-पिता से आपने क्या प्रभावशाली सीख पाई?
पिछले सप्ताह आपने क्या नई बात सीखी?
आखरी बार सिनेमा कब व किसके साथ गए थे?
आज तक आप कहाँ कहाँ घूमे हैं? सबसे शानदार अनुभव कहाँ का रहा?

स्कूल जीवन में कभी कोई क्लब बनाया है?
पहला विपरीतलिंगी मित्र कौन था? उसकी क्या बातें अच्छी लगती थी?
पहली बार देखी कोई सिनेमा याद है?
आपने आज तक ऐसा क्या किया है जिसके बारे में आज तक आपके माता पिता भी नही जानते?
अपने दादा-दादी, नाना-नानी के साथ का कोई रौचक अनुभव बताओ।
जीवन साँसों से नही गिना जाता, जीवन वे अवसर हैं जब आपकी साँसें थम जाती है। इस उक्ति के अनुसार आप अपने जीवन के कुछ अवसर बताओ।
होस्पिटल का कोई अनुभव बताओ।
आप या आपका कोई परिचित कभी टेलेविजन के राष्ट्रीय प्रसारण में गया है?
जीवन की कोई ग्रुप के साथ की गई लम्बी यात्रा बताओ?
 आपने अब तक सबसे बुरा मोसम कब देखा? वर्णन करो।
अपने बचपन का सबसे जादूई पल याद करो।
पिछले सप्ताह का सबसे अच्छा समय और सबसे बुरा समय सन्क्षेप में बताओ।
सबसे बुरा/अच्छा साक्षात्कार कौनसा था?
आपके घर में आकर ठहरे सबसे बुरे मेहमान के बारे में बताओ?
अपने सबसे भयानक सपने के बारे में बताओ।
किस अवसर पर आप सबसे अधिक डर गये थे?
क्या आपका कोई परिचित/आप किसी बड़ी धोखाधड़ी का शिकार हुए हो? विवरण दें।
सबसे बुरी नौकरी कौनसी थी? / अच्छी नौकरी ?
आपके परिवार पर बाहर से सबसे अधिक प्रभाव क्या पड़ा?
आपकी अब तक की सबसे शानदार रचना क्या है? / थी?
आज तक सबसे अधिक साहस का क्या काम किया है?
बचपन का सबसे बुरा अनुभव बताओ?
क्या आपने कभी पैराशूट जम्पिंग की है?
बचपन की सबसे सुखद घटना बताओ?
जिन्दगी का सबसे कठिन सबक कौनसा था?
कोई आखरी मोका बताओ जब आप घर पर ताजा फूल खरीद कर लाए थे?

अपनी पसन्द के बारे में बोलो

अपनी पसन्द का खाने का कोई ब्राण्ड बताओ।
अपनी पसन्द का खाना बताओ आप कितने अंतराल से इसका आनन्द ले लेते है?
अपनी पसन्द की मूवी आज तक आपने कितनी बार देखी है?
आपका सपने का व्यवसाय/नोकरी क्या है?
आपको किसी से मिलना हो तो साक्षात मिलना/चिट्ठी/ईमेल/फोन कर लेना ठीक रहता है?
आप को गाँव की शांत जिन्दगी पसन्द है या शहर की गहमा गहमी?
अकेले पढ़ना पसन्द करते हो या संगीत/मित्र के साथ ठीक रहता है?
दिमागी कसरत अच्छी लगती है या शारीरिक? नियमित करते हो?
आपको लोगों से सीधे सपाट सुनना पसन्द है या चाहते हो कि वे आपसे सोच समझ कर बोले। 
आप अग्रिम योजनाएं बना लेना पसन्द करते हो? क्यों?
अपना पसन्दीदा खेल बताओ। आप अक्सर जीतते हो?
अपना पसन्द का सीरियल बताओ।
घूमना फिरना पसन्द है या घर पर ही रहना?
आप शांति पसन्द करते हो या कोई उपयोगी वाद-विवाद?
आधी छुट्टी में आप अक्सर क्या खेला करते थे?
अपना पसन्द का घर में कमरा कौनसा है? क्यों?
सपनों की दुनिया बताओ जहाँ छुट्टियाँ बिताना चाहते हो।
तुरन्त निर्णय ले कर काम निपटाना ठीक रहता है या सब उपलब्ध अवसरों को खोज और विचार करके?
आप किस तरह का संगीत पसन्द करते हो और कितने अंतराल से सुन लेते हो?
पाँच इन्द्रियों में कौनसी इन्द्री आपके लिए वरदान है? क्यों?
जब आप विवाद में उलझ जाते हो तो तुरन्त निपटाते हो या बाद में सुलझाने के लिए फिर बैठना पसन्द करते हो?
किन कामों के लिए आप खुद करने के बजाय पैसा देना पसन्द करोगे?
आप अक्सर कौनसी पुस्तक पढ़ने की सलाह देते हो क्यों?
औरतों/पुरूषों की कौनसी बात आपको सबसे अधिक अखरती है?
औरतों/पुरूषों की कौनसी बात आपको सबसे अधिक पसन्द है?
समाचार जानने का सबसे अच्छा माध्यम क्या है?
आपका सबसे प्यारा रंग कौनसा है? क्यों?
अपनी पसन्द के कुछ प्रश्न छाँटो जिनका उत्तर आप देना चाहते हो/लोगों से जानना चाहते हो?
आप लोगों के चेहरे पर किस तरह के भाव पसन्द करते हो?
पसन्द का कोई काम जिसे करते करते आप थकते नही?
आप अपनी किस जीवित/मृत व्यक्ति से तुलना करते हो? क्यों?
किन विषयों पर बात करना आपको अच्छा लगता है?
सफर के लिए आप स्टेशन पहले पहूँच जाते हो या एकदम टाइमटेबल के अनुसार ?
आप सबसे अधिक किसकी प्रशंसा करते हो? क्यों?
सही सही काम करने की इच्छा वाले लोगों की कौनसी बात आपको सबसे ज्यादा अखरती है?
लोगों को सीख देने का कौनसा तरीका पसन्द है? क्या आप पूछे जाने का इंतजार करते हो?
अपने पसन्द के अब तक के कोई तीन टीवी सीरियल बताओ?
घर में रखे सभी उपकरणों में आप किस उपकरण का उपयोग सबसे अधिक पसन्द करते हो?
दुनिया में सबसे अच्छी ध्वनि कौनसी है? और बुरी ?
सिनेमा जाते हो तो कहाँ सीट पर बैठना पसन्द करते हो? बीच में/किनारे पर/ आगे/पीछे
सूरज का उगना/छिपना आपको अक्सर कहाँ से दिखाई देता है?
सबसे ज्यादा ना पसन्द शारीरिक व्यायाम/क्रिया/खेल/काम क्या है?
बचपन की कोई कहानी बताओ जो आपने सबसे ज्यादा सुनी या सुनाई?
शतरंज या कैरम बोर्ड दोनों में से कौनसा खेल पसन्द है?
टीशर्ट पर या कार पर क्या लिखाना पसन्द करोगे?
आपकी पसन्द का पर्फ्यूम क्या है?
कौनसा खेल टीवी पर देखना पसन्द है? क्यों?
मोका मिलने पर अपने परिवार या दौस्तों के साथ क्या खेलना पसन्द करते हो?
अपनी छुट्टियों की पहले से तैयारी करते हो?
आपकी पसन्द का जेवर कौनसा है?
अपने सिद्धाँतों के बारे में बढ़ा चढ़ा कर बात करने वाले लोगों के बारे में आपकी क्या राय है?
ऐसा क्या है जो सलीके से ना किया हो तो आप बेचैन हो जाते हो?
तारे गिनना पसन्द है या पक्षियों को उड़ते देखना?
अपनी पसन्द की पत्रिका बताओ? इसमें सबसे अच्छा क्या है?
सबसे बेकार मूवी कौनसी थी? किसके साथ देखी थी?
सफर के दौरान आप क्या करते हो?
आप नई चीजें करना सीखना चाहते हो या दिमाग से समझना चाहते हो?
सप्ताह का सबसे पसन्दीदा दिन कौनसा है?
वर्ष भर में कौनसा मोसम पसन्द है? क्यों?
घर पर अकेले होते हो तो टीवी, रेडियो, वीडियो ऑन चाहते हो या शांत अकेले रहना पसन्द है?
घर में आपकी चीजें हमेशा एक निश्चित स्थान पर मिलती है? या जरूरत पड़ने पर उसे हर बार नई जगह पाते हो?
आपकी नजर में सबसे अच्छा खाना कौन बनाता है? उसकी क्या खासियत है?
अपनी जान पहचान में सबसे हूनरमन्द व्यक्ति कौन है?
आप को किस वाहन का सफर पसन्द है? किस वाहन में बैठना अभी सपना है?
अपनी पसन्द की कोई कविता सुनाओ?
अपनी पसन्द का कोई आदर्श वाक्य बताओ। क्यों पसन्द है?
खिड़की में से झांकना पसन्द है या दीवार के सहारे टहलना?
जब आप सोते हो तो शरीर किस स्थिति में पसन्द करते हो? उठते समय आप खुद को किस स्थिति में पाते हो? पेट के बल/कमर के बल/ साइड में/पैर की स्थिति?
आप किस तरह का म्यूजियम देखना पसन्द करोगे?
इनमें से आप कहाँ जाना पसन्द करोगे? सरकस/चिड़ियाघर/मेला/परेड
अक्सर छुट्टियाँ किस तरह बीतती है? क्यों?
अकेले होने पर आप अपनी किस पसन्द की जगह पर जाना चाहोगे?
आपको चुटकले याद रहते है? इन दिनों का शानदार चुटकला सुनाओ।
दुनिया में आपका पसन्दीदा व्यक्ति कौन था/है?
आपका सबसे पसन्दीदा गाँव/शहर कौनसा है?
अपनी पसन्द की कोई चित्रकारी बताओ। आपको इसमें क्या आकर्षित करता है?
किस सामाजिज मुद्दे पर आप उत्तेजित हो उठते है?
नए लोगों से मिलते हो तो कौनसी तीन बातें आपको सबसे अधिक आकर्षित करती है?