बच्चों को मोबाइल और नेट की दुनिया से बाहर निकालो। माता पिता आगे आएं

👉इस पृथ्वी नाम की चट्टान की सतह से तुम चिपके हुई विश्राम कर रहे हो।
👉चेतना के विराट सागर में इस पृथ्वी की गति एक लाख दस हजार किमी/घण्टा है।
👉इस चट्टान पर विश्राम के समय तुम्हे एक स्पेस सूट दिया गया है जिसे देह कहते है।
👉 जब प्राण एक क्षमता तक सक्रीय हो जाए तो तुम संकल्प मात्र से स्पेससूट त्याग कर बाहर निकल सकते हो।
👉जड़त्व और गुरुत्वाकर्षण की पढ़ाई ने हमें भारहीनता का अनुभव भुला दिया।
👉 दरअसल खड़ा होकर हाथ ऊपर करना थकाने वाला होना ही न चाहिए।
👉यह तो भयानक 😀 होना चाहिए जैसे तीव्र उड़ते विमान का गेट खोल कर तुम्हे खड़ा कर दिया जाए।
👉छलांग लगाने की कल्पना मात्र तुम्हे डरा दे।
👉देह का दर्द भय या रोमांच में रूपांतरित होना चाहिए अभ्यास के प्रभाव से।
👉जैसे तीव्र गति से चलते किसी विमान से बाहर छिटकने का रोमांच हो।
👉 दरअसल धरती से आप जो आहार ग्रहण करते हैं हवा पानी और भोजन यह आहार आपकी देह अर्थात स्पेस सूट के लिए है।
👉 इस स्पेस सूट को जिसने धारण किया हुआ है उस धारक का आहार कहां है? वह कैसे पुष्ट होगा?
👉 इस दिशा में आप विचार करें और किसी सहयोग की आवश्यकता हो तो,...
☺एक माह के हमारे सुझाए अभ्यास से आप जीवन में असाधारण बदलाव पाएंगे।
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सुरेश कुमार शर्मा
09929515246

FAQ - Frequently Asked Questions for Engineering of Psychoware and Somatoware.



Engineering of Psychoware & Somatoware is going to be industry of future. It is total solution for all walks of life and beyond. Life coaches in the form of Engineers of psychoware and somatoware are future leaders.

What is Psychoware?

Psychoware is a new term coined to reflect a new version of existence. Psychoware is invisible and scalable factors of life we use but cannot touch like: life energy, emotions, attitude, skill, wisdom etc. these are expression of consciousness.

What is Somatoware?


Somatoware is a new term coined to reflect a new version of existence.Somatoware is visible and measurable factors of life we use and can touch like: skin, bone, blood etc. it is expression of material existence.

A teacher must be a Global Educator as an Engineer of psychoware and somatoware by 2020.
Role of teacher must be borderless and boundary less. He is responsible for whole life of his students. He may not escape from his duty as a creator of greater society. Teacher is not just for classroom.  And his role is not just as feeding agent. At present in the name of teaching we are shaping generations as per industrial requirement. ILO classifications tell us there are about 5000 branches of services or goods industries. Institutions across the globe are just hunting suitable human resource to feed or shape them as per requirement of industry. Institutions across the globe direct or indirect are affiliated to certain industry or they serve industries collectively. In return institutions get huge funds from these industries. You may take it as at present society is running without teachers. There is nowhere a teacher in formal education system. There are agents of industries who are feeding their own institutions in the name of education. Now it is need of time to appoint teachers in a parallel program. 

Teachers' Transfer is great Industry in India... A proposed solution.

भारत के सरकारी शिक्षण ढांचे में ट्रांसफर उद्योग दीमक का काम कर रहा है। न शिक्षक शिक्षण में रुचि दिखा रहे ना प्रशासक इस चिंता में कि कक्षाएं ठीक से कैसे चले। जानबूझ कर किसी शिक्षक को घर से दूर नियुक्ति देना, रिश्वत लेकर उसे वापस घर के नजदीक लगाना, पर्दे के पीछे का खेल सब खेल रहे हैं। राजनैतिक मित्रता शत्रुता निभाने के लिए भी ये एक अच्छा खेल है।

ऐसे में एक युक्ति संगत उपाय क्या हो सकता है?

मेरा सुझाव है किए एक डिजिटल प्रणाली विकसित की जाए जिसमें हर विद्यालय के छात्र, अभिभावक, नागरिक एक पैड SMS के जरिये शिक्षक का चुनाव कर सकें। रिंग टोन, टीवी के विभिन्न कार्यक्रमों में राय शुमारी के लिए ये तरीका अपनाया जाता है।

शिक्षा विभाग की आय का भी ये एक बेहतर जरिया हो सकता है। जिनकी शिक्षा में रुचि है वे एस एम एस के जरिये इस प्रकार से धन से भी सहयोग कर सकते हैं।

अब प्रश्न फर्जी और प्रायोजित एस एम एस का है...

सबसे पहले छात्र-अभिभावक के वोट का अधिक भार नियत किया जाए क्यों कि वे विद्यालय के सीधे हितकारी है। अन्य सामान्य नागरिकों के एस एम एस वोट का मूल्य छात्र-अभिभावक से कम रखा जाए परंतु उनका कुल भार छात्र-अभिभावक से अधिक हो जाए तो फिर छात्र-अभिभावक की राय के विपरीत भी शिक्षक की नियुक्ति की जा सकती है।

शिक्षक अपनी रुचि के स्थान पर लोकप्रियता बनाए रखने के लिए मन लगा कर काम करेंगे।
अवैध एस एम एस से भी कोई आपति नही होनी चाहिए। शिक्षक अपना धन खर्च कर के भी किसी स्थान पर स्थानांतरण के लिए एस एम एस करता है तो वह अपने वेतन के त्याग के बदले वह पद हासिल कर रहा है।